स्थाई सदस्यता के लिए भारत 'वीटो पावर' न होने के विकल्प पर भी तैयार
9/3/2017
NationalDuniya

संयुक्त राष्ट्र सुधार प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के प्रयास के तहत भारत और जी4 के अन्य देशों ने कहा है कि वे सुधार के लिए नवोन्मेषी विचारों के लिए तैयार हैं और स्थाई सदस्य के तौर पर तब तक वीटो का अधिकार नहीं होने के विकल्प को लिए भी तैयार हैं जब तक इस बारे में कोई फैसला नहीं हो जाता।संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई प्रतिनिधि सैयद अकबरूद्दीन ने बुधवार को अंतर सरकारी वार्ता बैठक में एक संयुक्त बयान में कहा कि सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए बड़ी संख्या में संरा सदस्य देश स्थाई और अस्थाई सदस्यता के विस्तार का समर्थन करते हैं।जी 4 में भारत के अलावा ब्राजील, जर्मनी र जापान शामिल हैं। वीटो के मुद्दे पर अकबरूद्दीन ने कहा कि वीटो के सवाल पर कई लोगों ने अलग अलग नजरिए से गौर किया, लेकिन जी 4 का रूख यह है कि वीटो कोई समस्या (नए स्थायी सदस्यों को तत्काल देने के संदर्भ में) नहीं है, लेकिन समस्या अवरोधों का प्रावधान करने को लेकर है।जी4 ने एक बयान में कहा, हमारा रूख इसी भावना के अनुरूप है। नए स्थायी सदस्यों के पास सैद्धांतिक तौर पर वो सभी जिम्मेदारियां और बाध्यताएं होंगी, जो मौजूदा समय के स्थायी सदस्यों के पास है, हालांकि नए सदस्य वीटो का उपयोग तब तक नहीं करेंगे जब तक समीक्षा के दौरान कोई फैसला नहीं हो जाता। इस समूह ने कहा कि वीटो का मुद्दा अहम है, लेकिन सदस्य देशों को सुरक्षा परिषद की सुधार प्रक्रिया पर वीटो नहीं होने देना चाहिए।

 
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